अयोध्या भारत के सबसे प्राचीन तीर्थों में से एक है। रामायण में यह कोसल राज्य की राजधानी और प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि है; हिंदुओं के लिए यह उन सात पवित्र नगरियों में से एक है जिनकी यात्रा मोक्ष की ओर ले जाने वाली मानी जाती है। जैन परंपरा इसे कई तीर्थंकरों की जन्मभूमि के रूप में पूजती है, और इसका संबंध बौद्ध और सिख परंपराओं से भी है।
आज ज़्यादातर यात्रियों का उद्देश्य राम मंदिर में दर्शन होता है, लेकिन यह नगर थोड़ा और समय देने पर बहुत कुछ देता है: क़िले जैसी हनुमान गढ़ी, कनक भवन के चित्रित दालान, और सरयू की वे शामें जब दीप जलते हैं।
राम मंदिर का संक्षिप्त इतिहास
मंदिर उस स्थान पर खड़ा है जिसे हिंदू परंपरा राम जन्मभूमि, यानी प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली के रूप में पूजती है। नवंबर 2019 के भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद भारत सरकार ने इसके निर्माण और प्रबंधन के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया। भूमि पूजन 5 अगस्त 2020 को हुआ, और रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा गर्भगृह में 22 जनवरी 2024 को हुई। परिसर के बाक़ी हिस्से का निर्माण उसके बाद चरणों में चलता रहा।
जो जगहें छोड़नी नहीं चाहिए
राम मंदिर और रामकोट
राम मंदिर और रामकोट हनुमान गढ़ी
टीले पर बना हनुमान जी का गढ़
नगर के बीच एक टीले पर बना क़िले जैसा मंदिर, जहाँ 76 सीढ़ियाँ चढ़कर पहुँचा जाता है। परंपरा के अनुसार तीर्थयात्री सबसे पहले यहीं आकर अयोध्या के रक्षक हनुमान जी से प्रभु श्रीराम के दर्शन की अनुमति माँगते हैं।
राम मंदिर और रामकोट
राम मंदिर और रामकोट सभी दस जगहें, हर एक की व्यावहारिक जानकारी के साथ, दर्शनीय स्थल पेज पर देखें।
कितने दिन?
- एक दिन राम मंदिर, हनुमान गढ़ी, कनक भवन, दशरथ महल और सरयू आरती के लिए काफ़ी है।
- दो दिन में आप दो बार दर्शन कर सकते हैं (सुबह और शाम का अनुभव अलग होता है), गुप्तार घाट और नदी किनारे के मंदिर देख सकते हैं, और दोपहर में आराम कर सकते हैं।
- तीन से पाँच दिन उस सर्किट की सामान्य अवधि है जिसमें प्रयागराज और वाराणसी, या लखनऊ जुड़ता है।
एक दिन का कार्यक्रम
- सुबह जल्दी: हनुमान गढ़ी, फिर राम मंदिर — जब कतार छोटी हो।
- देर सुबह: कनक भवन और दशरथ महल, जो कुछ ही मिनट की पैदल दूरी पर हैं।
- दोपहर: भोजन और आराम — गर्म महीनों में ज़रूरी।
- देर दोपहर: ई-रिक्शा से नया घाट; नागेश्वरनाथ मंदिर देखें और राम की पैड़ी पर टहलें।
- सूर्यास्त: सरयू आरती, फिर जगमगाते घाट।
पर्व-त्योहार
- राम नवमी (मार्च या अप्रैल) प्रभु श्रीराम के जन्म का पर्व है और साल की सबसे बड़ी भीड़ खींचता है।
- दीपोत्सव, दीपावली की पूर्व संध्या पर (अक्टूबर या नवंबर), घाटों को असंख्य मिट्टी के दीयों से जगमगा देता है।
- कार्तिक मास में पंचकोसी और चौदह कोसी परिक्रमा होती है और कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान।
- सावन झूला मेला (जुलाई या अगस्त) और विवाह पंचमी (नवंबर या दिसंबर) यहाँ के महत्वपूर्ण स्थानीय उत्सव हैं।
तिथियाँ हिंदू चंद्र पंचांग के अनुसार चलती हैं और हर साल बदलती हैं। देखें कब जाएँ।
भोजन
मंदिरों के आसपास भोजन शाकाहारी है, और मंदिर नगरी में शराब नहीं बिकती। सादी उत्तर भारतीय थाली, नाश्ते में कचौड़ी-सब्ज़ी, चाट, लस्सी और पेड़े जैसी दूध की मिठाइयाँ मिलेंगी। कई आश्रम और धर्मार्थ रसोइयाँ निःशुल्क या कम दाम पर भोजन (भंडारा) कराती हैं। बोतलबंद या फ़िल्टर किया पानी पिएँ।
पैसा और कनेक्टिविटी
एटीएम बहुत हैं और यूपीआई भुगतान लगभग हर जगह चलता है, हालाँकि ई-रिक्शा चालक और छोटे ठेले नक़द पसंद करते हैं — छोटे नोट साथ रखें। मोबाइल नेटवर्क अच्छा है, लेकिन याद रखें कि मंदिर के भीतर रहते समय आपका फ़ोन लॉकर में होगा; अपने समूह के साथ पहले से मिलने की जगह तय कर लें।
शिष्टाचार
- शालीन कपड़े पहनें और किसी भी मंदिर में प्रवेश से पहले जूते-चप्पल उतारें।
- कतार में चलें और स्वयंसेवकों व पुलिस के निर्देश मानें; गर्भगृह के सामने देर तक न रुकें।
- साधुओं, पुजारियों या घाट पर स्नान करते लोगों की तस्वीर लेने से पहले पूछ लें।
- घाट साफ़ रखें — नदी में प्लास्टिक या प्लास्टिक में लिपटा चढ़ावा न छोड़ें।
सुरक्षा और स्वास्थ्य
- बंदर हनुमान गढ़ी और रामकोट के आसपास हर जगह हैं। खाना या प्रसाद खुले में न रखें, और चश्मा तथा छोटे बैग सँभालकर रखें।
- गर्मी: अप्रैल से जून तक दोपहरें ख़तरनाक रूप से गरम होती हैं। जल्दी निकलें, ख़ूब पानी पिएँ और सिर ढककर रखें।
- भीड़: त्योहारों के दिन बच्चों को पास रखें, बुज़ुर्गों के पास लिखा हुआ संपर्क विवरण रखें और मिलने की जगह तय कर लें।
- दलाल: सशुल्क दर्शन, “विशेष” प्रवेश या अनधिकृत दान वसूली के प्रस्तावों को अनदेखा करें।
- नदी: सरयू की धारा तेज़ है, ख़ासकर बरसात में। केवल मुख्य घाटों पर स्नान करें और बैरिकेड के भीतर रहें।
क्या साथ रखें
- हर वयस्क के लिए सरकारी फ़ोटो पहचान पत्र
- आसानी से उतरने वाले जूते-चप्पल और एक जोड़ी मोज़े
- गर्मियों में टोपी या गमछा, सनस्क्रीन और पानी की बोतल; दिसंबर और जनवरी में गरम कपड़े
- प्रसाद के लिए कपड़े की छोटी थैली, और छोटे नोटों में कुछ नक़दी
- नियमित दवाइयाँ — जो ज़रूरी हो वह कतार में लगने से पहले ले लें

