अयोध्या की जलवायु उत्तर भारत के मैदानों जैसी है: छोटी, ठंडी और अक्सर कोहरे वाली सर्दी, बहुत गरम और सूखी गर्मी, और उमस भरी बरसात। मंदिर साल भर खुला रहता है, इसलिए असली सवाल यह है कि आप कितनी गर्मी, बारिश या भीड़ सहने को तैयार हैं।
संक्षेप में: सुहावने मौसम के लिए अक्टूबर से मार्च के बीच आएँ। सबसे कम भीड़ के लिए त्योहारों और स्कूल की छुट्टियों से बाहर के सामान्य कार्यदिवस चुनें।
मौसम एक नज़र में
| ऋतु | महीने | मौसम | जानने योग्य बात |
|---|---|---|---|
| शरद | अक्टूबर–नवंबर | गुनगुने दिन, सुहावनी शामें | दीपोत्सव और कार्तिक के पर्व; काफ़ी पहले बुक करें |
| सर्दी | दिसंबर–फ़रवरी | ठंडे दिन, सर्द रातें, अक्सर कोहरा | ट्रेनें और उड़ानें अक्सर लेट; पत्थर का फ़र्श ठंडा रहता है |
| वसंत | मार्च | गुनगुना और सूखा | गर्मी बढ़ने तक आरामदेह; राम नवमी महीने के अंत में पड़ सकती है |
| गर्मी | अप्रैल–जून | बहुत गरम, अक्सर 40°C से ऊपर | भोर में या सांझ के बाद जाएँ; राम नवमी अक्सर अप्रैल में पड़ती है |
| बरसात | जुलाई–सितंबर | गरम, उमस भरा, तेज़ बौछारें | कम यात्री; सरयू उफान पर रहती है |
अक्टूबर और नवंबर: उत्सवों का मौसम
बारिश थम जाती है, हवा साफ़ हो जाती है और सरयू किनारे की शामें अपने सबसे अच्छे रूप में होती हैं। इसी समय अयोध्या दीपावली की पूर्व संध्या पर दीपोत्सव मनाती है: राम की पैड़ी और आसपास के घाट मिट्टी के दीयों से सज जाते हैं — आयोजकों के अनुसार हाल के वर्षों में बीस लाख से ज़्यादा — साथ में लेज़र शो, शोभायात्राएँ और रामलीला का मंचन होता है। यह भव्य होता है और भीड़ बहुत ज़्यादा रहती है। होटल भर जाते हैं और सड़कें बंद हो जाती हैं, इसलिए पहले से बुक करें या कुछ दिन पहले या बाद में आने की योजना बनाएँ।
इसके बाद आने वाले कार्तिक मास में चौदह कोसी और पंचकोसी परिक्रमा — पवित्र क्षेत्र की पैदल परिक्रमाएँ — और कार्तिक पूर्णिमा का स्नान होता है, और हर एक में बहुत बड़ी संख्या में तीर्थयात्री आते हैं।
दिसंबर से फ़रवरी: ठंड और कोहरा
दिन सुहाने और पैदल घूमने लायक होते हैं, लेकिन रातें और सुबहें ठंडी होती हैं, और सूर्योदय से पहले पत्थर पर नंगे पाँव खड़ा होना मोज़ों के बिना कठिन है। घना कोहरा मुख्य समस्या है: दिसंबर के मध्य से जनवरी के अंत तक यह ट्रेनों और उड़ानों को अक्सर लेट करता है और राजमार्गों की रफ़्तार धीमी कर देता है। 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा की वर्षगाँठ और मकर संक्रांति पर अतिरिक्त भीड़ रहती है।
मार्च से जून: राम नवमी और गर्मी
मार्च सुहावना रहता है। प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव राम नवमी मार्च के अंत या अप्रैल में पड़ता है और अयोध्या के कैलेंडर का सबसे बड़ा दिन है: मंदिर का समय बढ़ा दिया जाता है, लाखों तीर्थयात्री पहुँचते हैं, और नगर विशेष यातायात व कतार व्यवस्था पर चलता है। भक्ति और उल्लास चाहिए तो इसी समय आएँ; शांत दर्शन चाहिए तो इससे बचें।
अप्रैल से गर्मी तेज़ी से बढ़ती है, और मई-जून में लू के साथ तापमान अक्सर 40°C पार कर जाता है। अगर तब आना ही पड़े, तो मंदिर खुलते ही दर्शन कर लें, देर सुबह से देर दोपहर तक भीतर आराम करें, और सूर्यास्त के बाद घाटों पर जाएँ।
जुलाई से सितंबर: बरसात
बारिश गर्मी से राहत देती है, पर साथ में भारी उमस और अचानक तेज़ बौछारें लाती है। भीड़ कम रहती है, होटल के रेट घट जाते हैं और नगर हरा-भरा हो जाता है। सरयू चढ़ जाती है और निचले घाटों को डुबो सकती है, इसलिए नौका विहार और नदी किनारे की पहुँच पर रोक लग सकती है। सावन झूला मेला, जब देव-विग्रहों को सजे हुए झूलों पर विराजित किया जाता है, इसी मौसम में पड़ता है।
हफ़्ते के सबसे अच्छे दिन
राम मंदिर में मंगलवार से गुरुवार की सुबहें आम तौर पर सबसे शांत रहती हैं। सप्ताहांत, सार्वजनिक छुट्टियाँ और पूर्णिमा के दिन ज़्यादा भीड़ वाले होते हैं। हनुमान गढ़ी में सबसे ज़्यादा भीड़ मंगलवार और शनिवार को रहती है।

